What is Nematode नेमाटोड क्या है ?

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What is Nematode नेमाटोड क्या है ?
नेमाटोड एक तरह के बहुत सूक्षम कीट होते हैं जो पौधों की जड़ों को हानि पुहंचाते हैं | ये समस्या अधिकतर रेतीली मिटटी में आती है | नेमाटोड कई तरह के होते हैं तथा हर किस्म के नेमाटोड कुछ ही फसलों को क्षति पुहंचा सकते हैं |

इसके द्वारा ग्रस्त होने वाली फसलें –

नेमाटोड की किस्मों में से एक है – रुट नॉट नेमाटोड, इसके द्वारा प्रभावित होने वाली मुख्य फसलें हैं टमाटर, मिर्च, बैंगन, भेंडी, परमल, धान इत्यादि| ये नेमाटोड सबसे ज़्यादा फसलों पर असर करता है | रुट नॉट नेमाटोड जड़ों को हानि पुहंचाते हैं जिसके कारण जड़ों में गांठे पड़ जाती हैं व पौधे को पोषक तत्व मिटटी से नहीं मिल पाते हैं |

कैसे पहचाने ? –

नेमाटोड की समस्या अगर पहले भी आपके खेत में आयी है तो संभव है की उसी कारण आपके पौधे बढ़ न पा रहे हों | पौधे सुखके मुरझा जाते हैं तथा उनकी जड़ों में गांठे पड़ जाती हैं | नेमाटोड अगर छोटे पौधों पे अटैक करता है तो पौधे नर्सरी में ही मर जाते हैं और रोपाई लायक नहीं हो पाते | अगर कुछ पौधों की रोपाई हो भी जाती है तो उनमे फल और फूल की संख्या बहुत कम होती है |

समाधान व पौधे का संरक्षण –

नेमाटोड की समस्या अगर एक बार किसी खेत में आ जाये तो उससे पूरी तरह से निजात पाना संभव नहीं है |
नेमाटोड के असर को कम करने के लिए जैविक, मैकेनिकल व रासायनिक सभी उपचारों का इस्तेमाल करना अति आवश्यक है |

मैकेनिकल उपचार –

1. गर्मिओं के मौसम में मिटटी की गहरी जुताई करें तथा उसे मल्चिंग शीट्स से ढक कर 1 हफ्ते के लिए छोड़ दें, इसके बाद उसे पानी से 1 हफ्ते तक भरा रखें| इसके बाद फिरसे एक गहरी जुताई करके खेत को मल्चिंग शीट्स से ढक दें | इस तकनीक तो अपनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें की खेत में खर पतवार बिलकुल भी उगने न पाएं वरना इस तकनीक से नेमाटोड और बढ़ जायेंगे |

2. क्रॉप रोटेशन – मक्का, सोरगम, सोयाबीन, गेंदा जैसी फसलें रुट नॉट नेमाटोड को कम करने में लाभकारी होती हैं, इसलिए इन फसलों को नेमाटोड ग्रस्त खेतों में लगाएं

जैविक उपचार –

1. नीम आयल (50 %) – नीम के बीजों के तेल से बुवाई व रोपाई से पहले मिटटी भिगोने से नेमाटोड की अच्छी रोकथाम की जा सकती है |

2. खाद – सड़े हुए गोबर की खाद का ज़्यादा उपयोग करने से भी नेमाटोड का असर कम होता है |

3. माईकोरिहज़ा (VAM) – बुवाई से पहले बीजों को माईकोरिहज़ा के पेस्ट से कोट करने से व रोपाई के समय जड़ों को माईकोरिहज़ा के घोल में डुबा कर लगाने से नेमाटोड का असर काफी कम हो जाता है|

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